जनसंख्या वृद्धि पर निबंध

Essay on Population Growth in Hindi

Essay on Population Growth in Hindi: आज हम लेकर आये हैं जनसंख्या वृद्धि पर निबंध हिंदी में। जिसके आपको बढ़ती हुई जनसंख्या के बारे में अनेको जानकारियाँ प्राप्त होंगी जैसे – जनसंख्या वृद्धि क्या है, इसके फायदे-नुकसान, जनसंख्या वृद्धि के कारण, दुष्परिणाम और जनसंख्या वृद्धि को रोकने के उपाय। यह निबंद आपके लिए बहुत महत्वपूर्ण है जिसका इस्तेमाल आप अपने प्रोजेक्ट कार्यों के लिए कर सकते हैं।

प्रस्तावना

आज विश्व भर के लगभग सभी देशों में जनसंख्या वृद्धि एक अग्रणिम समस्या बन चुकी है। जनसंख्या का ऐसे लगातार बढ़ते रहना हम सभी के लिए तो समस्या है ही साथ ही पृथ्वी पर उपलब्ध सीमित साधनों का समय से पहले उपभोग हो जाने का खतरा भी है। यधपि जनसंख्या किसी देश एवं राज्य का प्रमुख तत्व है, और उसके बिना किसी राज्य या देश की कल्पना भी नहीं की जा सकती परन्तु किसी भी तत्व का अति हो जाना किसी बड़े खतरे का संकेत होता है। यदि बात करे भारत की तो पिछले दो दशकों से भारत में जनसंख्या में बहुत वृद्धि हुई है। आज भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा जनसंख्या वाला देश बन चुका है। दुनिया की पूरी आबादी का छठवां भाग भारत का है। अनियंत्रित रूप से बढ़ती हुई जनसंख्या हमारे सामने एक दानव की भांति अपना मुँह खोले खड़ी है। क्योंकि जिस गति से जनसंख्या में वृद्धि हो रही है वह अत्यंत दुःख दाई है।

जनसंख्या वृद्धि के कारण

भारतवर्ष में जनसंख्या की अत्यधिक वृद्धि के कुछ विशेष कारण हैं, जिनमें बाल-विवाह, बहु-विवाह, दरिद्रता, गर्म जलवायु, अशिक्षा, रूढ़िवादिता, ग्रामीण क्षेत्रों में संतति-निरोध की सुविधाओं का कम प्रचार हो पाना, परिवार नियोजन के नवीनतम साधनों की अनभिज्ञता एवं पुत्र की अनिवार्यता आदि मुख्य कारण हैं।

जनसंख्या वृद्धि के दुष्परिणाम

किसी भी देश के लिए प्रगति के मार्ग की सबसे बड़ी बाधा जनसंख्या वृद्धि का अनियंत्रित हो जाना है। हमारे देश भारत में जनसंख्या जिस गति से बढ़ रही है उसका प्रभाव आज हमारे सामने है। किसी भी देश के लिए बढ़ती हुई जनसंख्या का दुष्परिणाम निम्न है।

बेरोजगारी

जनसंख्या का अधिक हो जाना बेरोजगारी की समस्या को जन्म देता है। भारत में बेरोजगारी उच्चतम स्तर पर है। देश में रोजगारों की संख्या सीमित होने और जनसंख्या के लगातार बढ़ते रहने से बेरोजगारी की समस्या खत्म होने का नाम नही ले रही है। इस कारण लोगों में असंतुलन का भाव भी उत्पन्न हो रहा है।

गरीबी

संसाधनों के सीमित होने और जनसंख्या में लगातार वृद्धि होने से गरीबी की समस्या भी उत्पन्न होने लगती है। इससे प्रत्येक व्यक्ति के आय पर असर पड़ता है, और वह अपने जरूरत के साधनों को जुटाने में असमर्थ होता है।

महंगाई

जीवन यापन करने हेतु आवश्यक संसाधनों के सीमित होने और जनसंख्या बढ़ने से संसाधनो की मांग बढ़ते जा रही है जिससे देश में महंगाई की समस्या दिन प्रति दिन बढ़ाती जा रही है। संसाधनों के सीमित होने और इनकी खपत बढ़ जाने से ये समस्या पूरे विश्व भर में उत्पन्न हो चुकी है।

जनसंख्या वृद्धि को रोकने के उपाय

जनसंख्या वृद्धि को रोकना केवल सरकार की नहीं हम सबकी की भी जिम्मेदारी है। यह हम सबके प्रयासों से ही संभव हो पाएगा। इसे रोकने के कुछ उपाय निम्न हैं –
बाल विवाह एवं बहु विवाह जैसी कुप्रथाओं पर रोक लगाई जाए, परिवार नियोजन कार्यक्रमों का व्यापक प्रचार किया जाना चाहिए, अधिक बच्चों को जन्म देने वाले माता पिता को हतोत्साहित करने के लिए शासकीय सुविधाओं से वंचित रखा जाना चाहिए, भले ही वे किसी भी वर्ग के हों। बच्चों की आयु में अंतर, और परिवार नियोजन संबंधी सामग्री अपनाने की प्रेरणा देने चाहिए, एवं ग्रामीण इलाकों में लोगों को इन सबके प्रति जागरूक बनाने हेतु समय-समय पर अभियान चलाने चाहिए।

उपसंहार

विश्व के ज्यादातर देश जनसंख्या की वृद्धि में रोक लगाने के लिए निर्णायक कदम उठा रहें हैं। भारत देश में भी शहरी क्षेत्रों में जनसंख्या वृद्धि को रोकने के लिए लोग जागरूक हो चुके हैं, परन्तु यह जागरूकता ग्रामीण इलाकों में कम ही दिखाई पड़ती है। शिक्षा के निरंतर प्रसार से बाल-विवाह जैसी कुप्रथाएं आज ग्रामीण क्षेत्रों में भी नहीं दिखाई देती हैं, जो जनसंख्या वृद्धि को रोकने में एक सकारात्मक कदम है। यदि भारतवासी समझदारी से काम लें और हमारी सरकार भी इस दिशा में प्रयत्न शील रही तो हम जनसंख्या वृद्धि पर आने वाले पांच से आठ सालों में काबू कर सकते हैं। इस से देश और समाज की अनेक समस्याओं का स्वतः ही निवारण हो जायेगा।

हम आशा करते हैं की आपको हमारे द्वारा लिखा गया ये जनसंख्या वृद्धि पर निबंध (Jansankhya Vriddhi Par Nibandh) पसंद आया होगा। और भी अच्छे निबंध पढ़ने और लिखना सीखने के लिए हमारे साथ बने रहें।


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