पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध

Essay on Environmental Pollution in Hindi

पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध ( Essay on Environmental Pollution ): आज हम लेकर आये हैं ख़ास पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध जिसका उपयोग विद्यालय में पढ़ने वाले छात्र कर सकते हैं। साथ ही साथ इसे पढ़ने के बाद आपको अपने पर्यावरण के बारे में काफी कुछ महत्वपूर्ण जानकारियाँ प्राप्त होंगी जिनकी सहायता से आप अपने वातावरण को प्रदूषित होने से बचा सकते हैं।

प्रस्तावना

आज पर्यावरण प्रदूषण एक गंभीर समस्या बनता जा रहा है। यह हम मनुष्यों के इच्छित या अनिच्छित कार्यों द्वारा पर्यावरण में अवांछित एवं प्रतिकूल परिवर्तनों का परिणाम है। और आज इसका परिणाम पृथ्वी पर रह रहे सभी जीवों को भुगतना पड़ रहा है। आज हमारे सामने कोई सबसे बड़ी चुनौती है तो वो है हमारी पृथ्वी को पर्यावरण प्रदूषण से बचना, और अपने आने वाली पीढ़ी को एक स्वच्छ और सुंदर पर्यावरण प्रदान करना।

पर्यावरण प्रदूषण का अर्थ

वातावरण में अवांछनीय या हानिकारक पदार्थों का प्रवेश पर्यावरण प्रदूषण कहलाता है। प्रकृति में सभी जीवों के जीवन यापन के लिए, संतुलित वातावरण होता है, जिसमें सभी प्रकार के जीव जंतु पर्यावरण घटक जैविक, अजैविक पदार्थ एक निश्चित अनुपात में पाए जाते हैं।
जब एक संतुलित वातावरण में एक या एक से अधिक घटकों की प्रतिशत मात्रा घटती या बढ़ती है या किसी हानिकारक पदार्थों का वातावरण में प्रवेश होता है, तब इसे पर्यावरण प्रदूषण कहते हैं। यह प्रदूषित पर्यावरण जीव धारियों के लिए बहुत ही हानिकारक होता है।
जब वायु, जल, मृदा आदि में अवांछनीय तत्व घुलकर उसे इस हद तक गंदा कर देते है, कि स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर होने लगे तो इसे प्रदूषण कहते हैं। प्रदूषण से प्राकृतिक असंतुलन पैदा होता है।

पर्यावरण प्रदूषण के प्रकार

मुख्य रूप से पर्यावरण प्रदूषण चार प्रकार के होते हैं। वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, स्थल या भूमि प्रदूषण तथा ध्वनि प्रदूषण।

वायु प्रदूषण

वायु प्रदूषण- जब वायु अर्थात हवा में अवांछित पदार्थों जैसे धूल के कण, हानिकारक गैसों की उपस्थिति अधिक हो जाती है, जिससे जीव जंतु था प्रकृति दोनो को खतरा होता है, तब इसे वायु प्रदूषण कहते हैं, अर्थात वायु में ऐसे तत्वों की उपस्थिति जिससे जीवों के स्वास्थ पर हानिकारक प्रभाव पड़े वायु प्रदूषण कहलाता है।

जल प्रदूषण

जल में हानिकारक पदार्थों या घटक का समावेशन होने पर जल में रहने वाले जीवों के लिए अनुकूल परिस्थिति न रहे तब इसे जल प्रदूषण कहते हैं। जिन कारकों से जल प्रदूषण होता है, उन कारकों को जल प्रदूषक कहते है। जल उद्योगों और घरों से निकला हुआ कचरा कई बार नदियों और दूसरे जल स्त्रोतों में मिल जाता है, जिससे यह जल को प्रदूषित कर देते हैं।

भूमि प्रदूषण

भूमि में कुछ अपशिष्ट पदार्थों का प्रवेश जिससे भूमि के भौतिक, रासायनिक या जैविक गुणों में कोई ऐसा अवांछनीय परिवर्तन, जिसके प्रभाव से पादपों तथा भूमि पर निर्भर रहने वाले जीवों को हानिकारक प्रभाव का सामना करना पड़े भूमि प्रदूषण कहलाता है।
भूमि प्रदूषण का मुख्य कारण मनुष्य हैं। इनके द्वारा फैलाए जाने वाले अपशिष्ट पदार्थ जैसे पॉलिथीन, या खेतों में उपयोग होने वाले रासायनिक पदार्थ भूमि प्रदूषण के कारण हैं।

ध्वनि प्रदूषण

ध्वनि यंत्र या किसी अन्य स्रोत से निकलने वाली ध्वनि जो अरुचिकर हो या उच्च तीव्रता वाली अवांछित ध्वनि के कारण मानव वर्ग में उत्पन्न अशांति एवं बेचैनी की दशा को ध्वनि प्रदूषण कहते है। इसका भी मुख्य कारण मनुष्यों द्वारा ध्वनि यंत्रों का प्रयोग करना है।

प्रदूषण के रोक थाम के तरीके

क्योंकि पर्यावरण प्रदूषण का मुख्य कारण मनुष्य ही हैं, इसलिए हमें चाहिए कि प्राकृतिक एवं मानवकृत संसाधनों का उपयोग अपनी जरूरतों के अनुसार ही करें, तथा प्रदूषण को कम करने में अपना सहयोग दें। रोक थाम के तरीके निम्न हैं, जैसे – पेड़ों की कटाई पर रोक लगाने के लिए आवश्यक कदम उठाने चाहिए। प्लास्टिक के उपयोग पर रोक लगाना चाहिए, ईंधन वाली गाड़ियों का उपयोग कम से कम करना चाहिए एवं साइकिल का उपयोग करना चाहिए।

निष्कर्ष

जैसे-जैसे मनुष्य अपनी वैज्ञानिक शक्तियों का विकास करता जा रहा है, प्रदूषण की समस्या बढ़ती जा रही है। विकसित देशों द्वारा वातावरण का प्रदूषण सबसे अधिक बढ़ रहा है। यह एक ऐसी समस्या है, जिसे किसी विशिष्ट क्षेत्र या राष्ट्र की सीमाओं में बाँधकर नहीं देखा जा सकता।
यह आज के समय के लिए ही नहीं बल्कि आने वाले भविष्य के लिए भी एक गंभीर समस्या बनता जा रहा है। पर्यावरण में असंतुलन के लिए प्रमुख रूप से मानव ही जिम्मेदार है, और इसके रोकथाम के लिए हम मनुष्यों को ही आगे आना पड़ेगा।

आशा है कि आपको हमारे द्वारा लिखा गया ये Paryavaran Pradushan Par Nibandh आपको पसंद आया होगा।

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